parmatmana

Welcome! In the world of PARMATMANA { an Enlightened master}

“Parmatmana” : An ocean that can contain all pebble stones, castles, great mountain peaks within the highest peak of mountains within himself.

“Parmatmana”: The name is that of a tsunami that sweeps everything in its arms. Then there remains only one thing and that is the ocean! Infinite vast deep ocean.

the enlighted master

Based in DELHI. Available Worldwide.
These are some of my Quotes.

परमात्मनः क्या है?

Here is some brief details about the PARMATMANA

PARMATMAN AN ENLIGHTED MASTER.

परमात्मनः एक विराटता का नाम है। परमात्मनः एक आनंद का नाम है। परमात्मनः एक उत्सव का नाम है। परमात्मनः एक जीवन जीने का एक ढंग का नाम है। परमात्मनः यह एक ऐसी प्रेम की बाढ़ का नाम है जिसमें गोता लगाकर कोई भी प्रेम के में सरोबार हो जाता है। परमात्मनः एक ऐसे व्यक्ति का नाम जिसने इस युग को आज के जमाने का जीता जागता वैज्ञानिक धर्म दिया । परमात्मनः एक ऐसा सागर जो सभी कंकड़ों पत्थरों को, महलो चोबारो को , बड़े बड़े पर्वत शिखरों को अपने भीतर समाने की क्षमता रखता है परमात्मनः नाम है एक ऐसी सुनामी का जो सभी कुछ बहा कर अपनी आगोश में कर लेती है। फिर वहां केवल एक ही वस्तु रहती है और वह है सागर ! अनंत विशाल गहरा सागर। और जब भी कोई भी व्यक्ति इस बुद्धतत्व की स्थिति को पाता है तो देखता है कि यहां एक के अलावा दूसरा कोई है ही नहीं, बस उसी स्थिति का नाम बुद्धतत्व है। उसी स्थिति का नाम परमात्मा है और उसी स्थिति का नाम परमात्मनः है।

परमात्मनः जो कि मनुष्य को ही महत्व देते हैं ना कि सिद्धांतों को।

धर्म बना मनुष्य को सुखी करने के लिए , सिद्धांत बने मनुष्य को सुखी करने के लिए , शास्त्र बने मनुष्य को सुखी करने के लिए। लेकिन मनुष्य तो सुखी नहीं हो पाया क्योंकि समाज ने शास्त्रों को , सिद्धांतों को , धर्मों को ही मनुष्य के सिर पर रख दिया। समाज ने उन्ही शास्त्रों को सिधान्तो को मनुष्य की बेड़ियां बना दिया। आज ऐसा लगता है कि मनुष्य बना है धर्म के लिए , सिद्धांतों के लिए , शास्त्रों के लिए। सभी कुछ उल्टा हो गया और इसी विचारधारा को बदलने को ही परमात्मनः एक क्रांति कहते हैं।

PARMATMANA
PARMATMANA

बोध का जागरण ही धर्म है

परमात्मनः कहते हैं कि मनुष्य के बोध का जागरण ही धर्म है और इसके अलावा कोई भी धर्म नहीं है और जिसका बोध जाग गया वह धार्मिक , वह संतुष्ट , वह सुखी , वह मोक्ष को उपलब्ध ,वह परमात्मा को उपलब्ध। परमात्मनः कहते हैं तुम जन्मों से भाग रहे हो, उसी की खोज में अगर तुम्हारा मार्ग ठीक होता तो किसी को तो मिल गया होता लेकिन मिला तो नहीं। रुको दो क्षण बैठो। सोचो ! कि कहीं तुम जिस दिशा में भाग रहे हो, वह दिशा ही तो गलत नहीं है। हो सकता है वह दिशा ही गलत हो। और अगर तुम्हें सही दिशा को जानना है तो किसी भी बुद्ध को खोज लो। { बुद्ध यानि वही जिसे कोई प्रबुद्ध कहता है कोई ज्ञानी कहता है कोई भगवान कहता है }।

आज धरा पर फिर एक बुद्ध आया है

आज फिर प्रकृति नाच उठी है । आज हवाओं में फिर से उसी परमात्मा के घुंघरू की झंकार सुनाई देने लगी। आज फिर किसी के भीतर की वीणा ने नया तराना छेड़ दिया है । आज फिर संसार में कौवे गीत गाने लगे। आज फिर सागर ब्रह्म नाद करने लगा। आज फिर परमात्मा कण कण के ऊपर नित्य करने लगा। आज फिर खुदा अपने हाथ में जाम लेकर आया है और वो फिर प्रेम के दीवानों को पिलाने लगा है। आज फिर एक नया सवेरा जन्मा। आज सूरज नया होकर आया। इस बुद्धौ के जगत में , इस पैगंबरों के जगत में , इस तीर्थंकरों के जगत में। उसी माला में एक फूल और गूथ दिया गया है। उसी दीपमाला में एक दीपक और जल गया।

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