What is Dhram:’मनुष्य की लाश पर धर्म की स्थापना नहीं हो सकती’, परमात्मा के बोल को समझें

What is Dhram:'मनुष्य की लाश पर धर्म की स्थापना नहीं हो सकती', परमात्मा के बोल को समझें
What is Dhram:’मनुष्य की लाश पर धर्म की स्थापना नहीं हो सकती’, परमात्मा के बोल को समझें

एक ही सवालबारबार भिन्नभिन्न धर्मों के लोग आकर पूछते हैं (What is Dhram). परमात्मा समाज में हिंसा क्यों बढ़ रही है. अशांति क्यों फैल रही है ? उपद्रव क्यों हो रहे हैं. मनुष्य सुखी क्यों नहीं हो पा रहा है ? धर्म का लोप क्यों हो रहा है ? धर्म का लोप हो रहा है ये तो दिखता है. तुम्हें भी दिख रहा है.

तभी तुम पूछ रहे हो. मुझे भी दिख रहा है. तुम्हें भी अनुभव हो रहा है. लेकिन धर्म का लोप हो क्यों रहा है ? और उसी धर्म के लोप होने के कारण अशांति है. उपद्रव हैं. अपराध है. मनुष्य दुखी है. गरीब है. हां गरीबधर्म के लोभ के कारणक्योंकि सत्य जो धर्म है जिसे धर्म बुद्धों ने कहा है. उसका तो लोप हो रहा है. हांतुम्हारा हिंदूमुस्लिम बढ़े जा रहा है.

बागेश्वर धाम मदारी का खेल (What is Dhram)

नये नये मंदिर बन रहे हैं. मस्जिद बन रहे हैं. गिरजे और गुरुद्वारे बन रहे हैं. बौद्ध विहार बन रहे हैं. लेकिन वो धर्म नहीं है (What is Dhram). वो तो दुकानें हैं बेचारों की. जिसकों कुछ नहीं आता वो दुकान खोलकर बैठ जाता है. घंटियां बजाता है. थाली घुमाता है. दो दो रुपया एकत्रित करता है. और आज समाज में हो ही ये रहा है. अभी कोई मेरे पास आया.

वो बताता है कि भाई बागेश्वर धाम में भीड़ लगी हुई है. तो मैं कहता हूं कि मदारी का तमाशा देखने को तो भीड़ लगती ही है. कभी बुद्धों के पास भीड़ लगती देखी तुमनेबुद्ध के पास, नानक के पास, कबीर के पासकृष्ण जब आये तो कितने लोग थे जो उन्हें प्रेम करते थे. सारे के सारे कृष्ण के विपरीत सेना में खड़े थे. युद्ध करने के लिए. कृष्ण के साथ गिनती के लोग थे.

मदारी के साथ तो तुम खड़े रहते हो

तुम ये मत समझना कि जब बुद्ध आये, नानक आये, कबीर आये तो तुम नहीं थेतुम भी थे. तुम्हारे जैसे ही सारे थे. कितने नानक के साथ खड़े थे. कितने बुद्ध के साथ खड़े थे. हांमदारी के साथ तो तुम खड़े रहोगे. तो धर्म के लोप के कारण ही अशांति है. अपराध है. उपद्रव है. दुख है दरिद्रता है. दरिद्र यानी गरीबीक्यों क्योंकि तुम्हें भटकाव वाला धर्म सिखा दिया गया. हिंदू के घर में पैदा हुए बच्चे को हिंदू बना दिया गया.

मुसलमान के घर में पैदा हुए बच्चे को मुसलमानऐसे ही सिख और ऐसे ही ईसाईऔर तुम्हारे दिमाग में जबरन एक बात डाल दी गयी. तुम्हारे अपने ही मातापिता के द्वारा और वहां से बचे तो अपने ही धर्मगुरुओं (What is Dhram) के द्वाराकि धन, दौलत, वैभव, व्यापार, शिक्षा अपनेअपने देवी देवताओं सेअल्लाह से..गॉड सेअपनेअपने पूजनीय से मांगकर मिलती है. ऐसे देश अमीर होगा ? ऐसे देश पढ़ालिखा होगा ? तुम अपने बच्चे को कहते हो कि किताब मत पढ़ो. घर में तस्वीर लगा लो..विद्या की देवी की. आरती करना उसकी.

सत्य भी धर्म नहीं है (What is Dhram)

देश को गरीबी से मुक्त करने के लिए तुम्हें कुछ करना होगा. बोध के द्वारामेहनत करके. पूजा से नहीं होगा ये. और धर्म का लोप हो रहा है. धर्म की हानि हो रही है. सत्य की बात कर रहा हूं. सत्य भी धर्म नहीं है. वो सत्य है केवलऔर तुम्हारे हिंदूमस्लिम का नुकसान क्यों हो रहा है ? क्योंकि तुम मनुष्य की लाशों पर धर्म (What is Dhram) खड़ा करना चाहते हो. तुम मनुष्य को मारकर हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई की स्थापना करना चाह रहे हो. तुम फूलों को कुचलकर उसमें से खुशबू पैदा करने की कोशिश कर रहे हो. इसलिए तुम बदल रहे हो और भिखारियों की दुकानें इसलिए चल पड़ती है.

मनुष्य तो सुखी होगा तभी धर्म की स्थापना होगी

अभीअभी मैंने देखा. ये जो नाम लेता हूं ना मैं लोगों के..वो इसलिए कि तुम्हें तो समझ आये. तुम तो बचो. बागेश्वर धाम वाले के यहां सारे साधुसंत जा रहे हैं. चाहे कोई राजेंद्र दास हो. चाहे कोई रामादास हो. कोई ठाकुरकोई देवकाधीशसबसब जा रहे हैं. किसी ने पूछा क्यों जा रहे हैं. मैंने पूछा धन्यवाद देने जा रहे हैं कि हमारी सबकी दुकाने पिछले 20-30 साल से ठंडी हो गयी थी. अच्छा है धन्यवादतुमने फिर चालू करवा दी. फिर दुकानें चल पड़ी. यदि तम्हें लगता है कि वो दुख दूर कर सकता है.

मैं भी मानता हूं कि यदि वो कर सकता है तो करना चाहिए. बहुत अच्छायहां पर दिल्ली मेंबहुत अच्छा जैसा संसद भवन है. राष्ट्रपति भवन है. वैसा भवन बनाओ. अरे 135 करोड़ लोगों की तो बात है. और इनमें दुखी कितने होंगे (What is Dhram). 100 करोड़मोदी ने टीकाकरण दो सौ करोड़ के पार कर दिया. वो भी एक साल मेंतुम सौ करोड़ लोगों को सुखी नहीं कर सकते एक वर्ष मेंसुखी करो और उन्हें कहो कि जाओ अब दुकाने बंद..क्योंकि मनुष्य तो सुखी हो गया. धर्म की स्थापना हो गयी.

धर्म के लिए स्वंय की 'मैं' को मारना होगा

लेकिन मेरी इसी बात को बारबार सुनोगे तो हंसी आएगी तुम्हें. तुम कहोगे इस तरह थोड़े ना सुखी होते हैं लोगऐसे थोड़े ना धर्म मिलता है किसी कोबिल्कुल सही सोच रहे हो. ऐसे ना कोई सुखी होता है और ना धर्म मिलता है. धर्म के लिए स्वंय कीमैंको मारना होता है. स्वंय के अहंकार को मारना पड़ता है. जब तुम्हारा अहंकार मरता है तो वहां धर्म का एक फूल खिलता है. वहीं फूल जो कृष्ण के भीतर खिलाबुद्ध के भीतर खिला. नानकमोहम्मदजीससकबीरवो फूल खिलता है लेकिनमैंके मरने के बाद. फूलों के लाशों पर हवा में खुशबू नहीं बिखरतीसड़न बिखरती है. मनुष्य के लाशों पर धर्म की स्थापना नहीं होती है.

मनुष्य धर्म के ऊपर चाहिए (What is Dhram)

मनुष्य धर्म के ऊपर चाहिए जो धर्म के ऊपर बैठे फूलों की भांतिमनुष्य तो नीचे मार रहे हो. कब्र में दबा रहे हो. नींव में पत्थर बना कर दबा रहे हो. तुम चाहते हो कि धर्म की स्थापना हो जाए. असंभवमनुष्य कि वैल्यू है. जीवन की वैल्यू है. तुम्हारे मृत धर्म स्थलों कीकिसी एक की बात नहीं कर रहा हूं. धर्म स्थलों की और धर्म गुरुओं कीसाथ ही धर्म शास्त्रों की कोई आवश्यकता नहीं है.

और तुम जिसे ब्राह्मणवाद बोलते हो. हिंदू की बात कर रहा हूं यहां मैंमैं बहुत अच्छा जानता हूं ब्राह्मणवाद के बारे में क्योंकि मैं भी ब्राह्मण परिवार में पैदा हुआ. मेरे इस प्रकार के लैक्चर पर जितने कॉल आते हैं. जितनी चाकू मारने की धमकियां आतीं हैं. जितनी गोली मारने की धमकी आती है सारी तो तुम्हारे ब्राह्मणों से ही आती है. क्याक्या गाली दी जा रही है जो तुमने सुनी भी ना होऐसीऐसी तो गालियां हैं और वही ब्राह्मण जो सुबह आरतीओम जय जगदीश करके रहा है. ये तुम्हारे ब्राह्मणवाद हैं.

तुमने धर्म को केवल ब्राह्मण से और घंटी घुमाने से मान लिया

अभी तुमने ब्राह्मणों को छोड़ादुष्कर्मियों कोक्या तुम्हारा समाज है. तुम्हें समझ ही नहीं आया कि धर्म क्या है. अगर तुम ब्राह्मण को ही धार्मिक मान लो तो इसका मतलब तुमने साफ शब्दों में बोल दिया कि मुसलमान में तो धार्मिक हो ही नहीं सकता. ब्राह्मण ही नहीं है. ना सिख में, ना ईसाई में, ना बौद्ध में, ना जैन मेंहो ही नहीं सकता. तुम्हें समझ ही नहीं आया कि धर्म क्या है. तुमने धर्म को केवल ब्राह्मण से और घंटी घुमाने से मान लिया. फिर वही प्रश्न आता है. फिर वहीं उत्तर आता है कि मनुष्यों की लाशों पर धर्म की स्थापना नहीं होती है.

फूलों को कुचलकर खुशबू नहीं फैलाई जा सकती है. फूलों को पनपने दो अपनेअपने पेड़ों परजिस पौधे पर उग आयेचाहे वो गुलाब हो या गेंदाचाहे वो चंपा हो या चमेलीवो अपने आप खुशबू वातावरण में फैलाएगाइसी प्रकार मनुष्य जैसा पैदा हुआ है उसे वैसा ही रहने दो. अपने आप उसके ऊपर धर्म का फूल खिलेगा. मनुष्य के ऊपर खिलेगा. मनुष्य को तो तुमने बंदी बना दिया. मार दिया. बेड़ियां बना दी उसके चारो ओर धर्म कीकैसे धर्म का फूल खिलेगा.

आज केवल इतना हीशेष किसी और दिनअंत में चारों तरफ बिखरे फैले परमात्मा को मेरा नमनतुम सभी जागोजागते रहो