Bageshwar Dham यानी जोकर की दुकान, पढ़ें परमात्मा की क्या है राय

Bageshwar Dham यानी जोकर की दुकान, पढ़ें परमात्मा की क्या है राय
Bageshwar Dham यानी जोकर की दुकान, पढ़ें परमात्मा की क्या है राय

एक व्यक्ति आया और वह पूछता है कि परमात्मा मैं कौन सी सिद्धी करूं जिसमें सिद्ध (Bageshwar Dham) हो जाऊंजिससे मुझे बोध प्राप्त हो जाए. जिससे मैं उस परमात्मा को पा सकूंकैसेकैसे प्रश्न हैं तुम्हारेतुम परमात्मा को बाजारू वस्तु समझते होजिसे तुम पा सको अपने बल परअपनी सिद्धी के बल पर….संभव है ? जिसे तुम सिद्धी के बल पर पा लो वो परमात्मा नहीं हैवो तुक्ष्य होगा. परमात्मा, विराट, आनंद, उत्सव, जीवनये तुम्हारे बल पर नहीं मिलते. ये घटना तो घटी हुई है. बस तुम भूले हुए हो. तुम मुझसे जो पूछते हो या मुझे तुम समझते होउसके बाद ऐसा नहीं होगा कि तुम्हें आनंद मिलेगा. आनंद मिला हुआ है. तुम सभी ने मूढ़ों की बातें मानकर ये सोच लिया है कि तुम्हारे पास आनंद नहीं है.

जिनके नाम के आगे सिद्ध लगा हुआ है. वो पूरे पाखंडी हैं

अब प्रश्न था कि कौन सी सिद्धी (Bageshwar Dham) करूंकोई सिद्धी करनी ही नहीं होती, जिनके नाम के आगे सिद्ध लगा हुआ है. वो पूरे पाखंडी हैं. उन्हें कुछ नहीं मिला हुआ है और धर्म के क्षेत्र में कुछ मिलता भी नहीं है. यहां तो सबकुछ लुट जाता है. तुम्हारीमैंलुट जाती है. तुम्हारा अहंकार लुट जाता है. तुम हो ये भी लुट जाता है. बुद्ध के जीवन की घटना है. बुद्ध से किसी ने पूछा कि जब ज्ञान प्राप्त हुआ तो आखिर आपको क्या मिला ? क्या अंतर आपने महसूस किया. तो बुद्ध कहते हैं कि कुछ नहीं मिला. केवल इतना पता चला कि वो मिला ही हुआ था. मेरे बुद्ध के दृष्टांत से ये मत समझ लेना कि मैं तुम्हें बौध धर्म की ओर लेकर जा रहा हूं. बिल्कुल नहीं….जितने तुम बंधे हुए हो हिंदू से, मुसलमान से, सिख से, ईसाई सेउतने ही बौद्ध धर्म के अनुयायी बंधे हुए हैं. दोनों में जरा भी अंतर नहीं हैं. बुद्ध की बात तो मैंने केवल ृष्टांत देने के लिए की थी. तुम उसे बुद्ध का बुधत्व कहो या कृष्ण का प्रज्ञावान होना कहो. कुछ भी बोलोया जीसस की मानवता बोलोमहावीर की अहिंसा बोलोकुछ भीऔर इसे मैंने नाम दिया है तुम्हारा जीवनवो जीवन है तुम्हाराऔर जीवन के स्वरुप में है तुम्हाराजीवन के स्वरुप में तुम्हें स्वंय को देखना है.

बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham)…नया जोकर

तो सिद्धी कौन सी करेंइन मूढ़ताओं में मत पड़ोढूंढ़ो किसी भी आदमी कोजिसकी सिद्धी आजतक पूरी हुई हो. कहानियों वाला आदमी नहींजो जीवित हो जो जागृत होउससे पूछो क्या सिद्धी की और क्या पूरी हुई. ईश्वर (Bageshwar Dham) प्राप्ति की कोई सिद्धी नहीं होती है. हांमैंने एक और मार्ग भी देखा है. श्मशान में से ऊपर जाता है. वहां भूतों की सिद्धि हो जाती है. और वहां जो सिद्धि करता है वो खुद भूत बन जाता है और दूसरों को मूर्ख बनाता है. यदि अभी तुम फेसबुक पर देखो तो एक नया जोकर मार्केट में आया है. बागेश्वर धामवो लोगों की बीमारियों को भूतप्रेत बताकरडराकर..उन्हें अपने साथ जोड़ता है. एकएक सेमिनार में उसके आप देखोगे तो हजारों लोग होते हैं. वहां जब वह भूतों की बात करते हैं तो सैकड़ों भूतों की तरह नाचने लग जाते हैं. घर में उनके पास कोई भूत नहीं था. ये क्या हैये केवल तुम्हारे दिमाग से खेला जा रहा है.

तुम अपने जीवन में एक प्रयोग करो

तुम एक प्रयोग करोकिया हो गया लेकिन तुमने देखा नहीं उसकी तरफतुम फिल्म देखने जाते हो. रोमांटिक फिल्म होती है. तो तुम खुद उस जैसा रोमांस करने लग जाते हो. वहीं बैठकरप्रेमिका हो या ना हो इससे तुम्हें फर्क नहीं पड़ता है. अगर एक्शन मूवी होती है तो तुम एक्शन करने लग जाते हो. तुमने मैच बहुत देखे होंगे. कैच आउट होन वाली होती है तो तुम कहते हो पकड़पकड़और तुम भी हाथ ऊपर उठा लेते हो. ये क्या है ? ये तुम उस समय के साथ बह जाते हो. ना तो तुम कैच पकड़ रहे हो. ना एक्शन मूवी कर रहे हो. ना रोमांस की मूवी कर रहे हो. लेकिन तुम उस सयम के साथ बह गये. ऐसे ही वो जोकर बागेश्वर धामभीड़ इकठ्ठी कर रहा है. उसमें सौ आदमी बह गये. हाथ पैर मारने लगेनाचने लगेउनपर भूतप्रेत गये और उनकी दुकान चल पड़ी. ये होती है सिद्धियांयदि तुम भी ऐसी ही सिद्धि करना चाहते हो तो जाओ उसके पासऐसी सिद्धी तो बहुत लोग कर लेगें और करा देंगे. बेचारों को तो दुकान चलानी है. वह स्वंय बोलता था. मैंने देखा कि वो तो अनपढ़ आदमी है. अब अनपढ़ आदमी बेचारा रोटी तो खाएगा. कोई दुकान तो चलाएगा. कोई बिजनेस तो करेगा. तो यही बिजनेस सही.

सिद्धि से तुम परमात्मा (Bageshwar Dham) को मुर्ख नहीं बना सकते

तो सिद्धि से तुम संसार को तो मुर्ख बना सकते हो लेकिन परमात्मा को नहीं. और यहां मिलता कुछ नहीं है, जो मिलता है वो भी लुट जाता है. वो भी छिन जाता है. होता क्या है आदमी के पासमैंहोती है. ‘मैंहिंदू ,’मैंमुसलमान, ‘मैंसिख, ‘मैंईसाई, ‘मैंबौद्ध, ‘मैंजैन और जब बुद्धत्व प्राप्त होता है. जब ज्ञान का उदय होता है. तो येमैंभी मिट जाती है. और तुम जो मुझे सुनते हो. मैं तुम्हें लोगों के नाम लेकर चेताता हूं. ये क्यों करता हूं जानते हो. ताकि तुम इधरउधर फंसों मत. स्वंय में केंद्रित हो जाओ. मेरे पास भी तुम्हें फंसना नहीं है. मेरे साथ भी नहीं जुड़ना है. तुम्हें स्वंय के साथ जुड़ना है. घूमकर अपने धूरी पर खड़े हो जाओ. वरना अगर तुम भी ये बोलोगे नहीं. जो मैं बोलता हूं. तो एक दिन तुम भी स्वंय परअपने ऊपर शर्म करोगे कि आखिर तुम्हें भी अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए थी. तुम्हें उस समय ग्लानी होगी. आत्म ग्लानी कि तुम्हें भी आखिर बोलना चाहिए था. उनके खिलाफ जो धर्म के नाम पर पाखंड कर रहे हैं. हां पाखंड कर रहे हैं. पाखंडी हैं.

सोचो मंदिर के बाहर एक भिखारी बैठा और मंदिर के अंदर भी

मंदिर के अंदर एक पुजारी बैठा होता है. वो तुमसे पैसे मांगता है. मंदिर के बाहर एक भिखारी बैठा होता वो भी तुमसे पैसे मांगता है. दोनों में भेद कितना हैकेवल कपड़े काकि उसने कुछ अच्छे कपड़े पहने हुए है. असली में वो भी तो एक भिखारी है. और केवल मंदिर मत गिननामंदिर का मेरा मतलब धर्म स्थल से है. वो हिंदू का भी हो सकता है. मुसलमान सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन किसी का भी हो सकता है. दोनों जगह ही धन मांगा जा रहा है. मंदिर के अंदर भी और मंदिर के बाहर भी. और दोनों ही भगवान के नाम पर मांग रहे हैं. तो बताओ एक को पुजारी और दूसरे को भिखारीकाम तो दोनों का एक जैसा है. या तो दोनों को पंडित कह लो या तो दोनों को भिखारी कह लो. तो ये जो भेदभाव है. एक पंडित, एक भिखारीएक वो जो तुम्हें अपने चरणों में झुकाता है जबकि एक बाहर है जिसे तुम अपने चरणों में झुकाते हो. ये पाखंड है.

एक लोटा जल अपने सिर पर चढ़ाओ

और सिद्धि की बात करते हो तुम..तुम्हें सिद्धि करनी है. तो सिद्धि का मैं तुम्हें बहुत ही सरल तरीका बताता हूं. बहुत जल्दी हो जाएगी. रोज सुबह एक लोटा जलतुम्हें उसमें दूध डालना है तो डाल लो. तुलसी, पत्ता, चावल, फूल सभी चीजें डालनाऐसा करके रोज सुबह एक लोटा जल अपने सिर पर चढ़ाओ और कहो कि ये जल मैं परमात्मा को अर्पित कर रहा हूं. रोज सुबहशायद 50 दिन भी ना करना पड़ेउससे पहले ही हो जाए. जिसे तुम मूढ़ता वश चिलिया कहते हो नाचालीस दिन में सिद्धिशायद 40 दिन में ही हो जाए. या चार दिन में ही हो जाए. पहले एक लोटा जल अपने सिर पर चढ़ाओफिर अपने ही पैर छू लोऔर कहो कि तुम परमात्मा के पैर छू रहे हो. अपने सामने सिर झुका लो. जब ये कृत्य करोगे तो हैरान हो जाओगे. कि भीतरतुम्हारे भीतर वो विराट बैठा है. तुम्हें वो टच कर लेगा. तुम उसे टच कर लोगेऔर फिर स्वंय पर हंसोगेकि हम..हमहीं ब्रह्म थे. और भिखारी बने बैठे थे. भिखारी बनकर घूम रहे थे. यही है सिद्धि बस

आज इतना हीशेष किसी और दिनचारों ओर फैले परमात्मा को मेरा नमनतुम सभी जागोजागते रहो