Bageshwar Dham Baba :चमत्कारी बाबा धीरेंद्र शास्त्री का काला झूठ

jagteraho

बागेश्वर धाम वाले के (Bageshwar Dham Baba)यहां सारे साधु संत जा रहे हैं. चाहे कोईं राजेंद्र दास हो या रमादासकिसी ने पूछा क्यों जा रहे हैंमैंने कहा कि वे धन्यवाद देने को जा रहे हैं. ऐसा इसलिए कि उनकी दुकानें पिछले कई वर्षों से बंद पड़ी थी जो अब चालू हो गयी. उनकी दुकानें चल पड़ी. अरे लगता है कि वह तुम्हारे दुख दूर कर सकता है तो अच्छी बात है. मैं कहता हूं कि दिल्ली में एक भव्य भवन बनाओ.

अरे देश के 135 करोड़ में से दुखी कितने होंगे. 100 करोड़एक वर्ष में जब कोरोना का टीका 200 करोड़ के पार जा सकता है तो तुम एक साल में 100 करोड़ आदमी को सुखी नहीं कर सकतेउन्हें सुखी करके कहो कि जाओअब दुकानें बंदक्योंकि मनुष्य तो सुखी हो गयाधर्म की स्थापना हो गयी. तुम हंसकर कहोगे कि ऐसे थोड़े ना धर्म की प्राप्ति होती है. हांतुमने ठीक कहाधर्म की प्राप्ति के लिए स्वंय केमैंको मारना होता है. स्वंय के अहंकार को मारना पड़ता है.

मनुष्य धर्म के ऊपर होने चाहिए (Bageshwar Dham Baba)

जब तुम्हारा अहंकार मरता है तो वहां धर्म का एक फूल खिलता है. वहीं फूल तो नानक, मोहम्मद, बुद्ध, कृष्ण, जीसस, कबीर के अंदर खिला लेकिनमैंके मरने के बादफूलों के लाशों से खुशबू नहीं बल्कि सड़ान बिखरती है. मनुष्य धर्म के ऊपर होने चाहिए. फूलों की तरहमनुष्य को तुम नीचे दबा रहे होकब्रों में..नींव मेंऔर चाह रहे हो कि धर्म की स्थापना हो जाएये असंभव है. जीवन की वैल्यू है. तुम्हारे मृत पवित्र स्थलों की वैल्यू नहीं है. मैं यहां हर धर्म के लोगों से कह रहा हूं. चाहे वो हिंदू हो, मुसलमान, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन होधर्म गुरुओं और धर्म शास्त्रों की कोई अवश्यकता नहीं है.

मैं हिंदू की बात कर रहा हूं

और जिसे तुम ब्राह्मणवाद कहते होमैं हिंदू की बात कर रहा हूं. ब्राह्मणवाद को मैं अच्छी तरह जानता हूं क्योंकि मैं इसी परिवार से संबंध रखता हूं. मेरे लेक्चर सुनने के बाद मुझे जितने फोन आते हैं. जान से मारने की धमकी दी जाती है वो सारे ब्राह्मण लोगों के द्वारा ही दी जाती है. वही ब्राह्मण जो सुबह आरती करके रहा है वो बाद में मुझे गाली देता है. ये तुम्हारा ब्राह्मणवाद है.

क्या तुम्हारा समाज (Bageshwar Dham Baba)

अभी तुम्ने पिछले दिनों ब्राह्मणों को छोड़ादुष्कर्मियों कोक्या तुम्हारा समाज है. तुम समझ ही नहीं पा रहे हो कि धर्म क्या होता है. यदि तुमने मान लिया कि ब्राह्मणवाद ही धार्मिक होता है तो इसका मतलब है कि तुमसे क्लियर तौर पर मान लिया कि मुसलमान तो धार्मिक हो ही नहीं सकता है. क्योंकि वह ब्राह्मण ही नहीं है. ना सिख में, ना ईसाई में, ना बौद्ध में, ना जैन मेंतुमने धर्म को केवल ब्राह्मण से और घंटी घुमाने से मान लिया. फिर मैं वहीं कहूंगा कि मनुष्य की लाशों पर धर्म की स्थापना नहीं हो सकती और फूलों को कुचलकर खुशबू नहीं फैलाया जा सकता है.

मनुष्य को तो तुमने मार दिया

फूलों को खिलने दो अपनेअपने पेड़ परचाहे वो कोई भी फूल होवह अपने आप खुशबू फैलाएगाउसी प्रकार मनुष्य जैसा पैदा हुआ है उसे वैसा ही रहने दो. वो अपने आप उसके ऊपर धर्म का फूल उगेगा. उसके ऊपरमनुष्य को तो तुमने मार दियाबंदी बना दियाउसके चारों ओर बेड़ियां डाल दी.

आज केवल इतना हीशेष किसी और दिनअंत में चारों तरफ बिखरे फैले परमात्मा को मेरा नमनतुम सभी जागोजागते रहो